सत्यदर्पण:-

सत्यदर्पण:- कलयुग का झूठ सफ़ेद, सत्य काला क्यों हो गया है ?-गोरे अंग्रेज़ गए काले अंग्रेज़ रह गए। जो उनके राज में न हो सका पूरा, मैकाले के उस अधूरे को 60 वर्ष में पूरा करेंगे उसके साले। विश्व की सर्वश्रेष्ठ उस संस्कृति को नष्ट किया जा रहा है, देश को लूटा जा रहा है। दिन के प्रकाश में सबके सामने आता सफेद झूठ; और अंधकार में लुप्त सच।

भारतीय संस्कृति की सीता का हरण करने देखो | मानवतावादी वेश में आया रावण | संस्कृति में ही हमारे प्राण है | भारतीय संस्कृति की रक्षा हमारा दायित्व | -तिलक 7531949051, 09911111611, 9999777358.

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शनिवार, 17 मई 2014

17, मई 2014 आज 19 वीं पुण्य तिथि पर श्रद्धा सुमन

17, मई 2014 आज 19 वीं पुण्य तिथि पर श्रद्धा सुमन 
19 वीं पुण्यतिथि वैशाख कृ तृतीया शनिवार 17 मई 2014 
माँ, जो गर्भ से मृत्यु तक, हर पल अपने बच्चों के हर दुःख सुख की साथी, जिसकी गोद हर पीड़ा का हरण करती है। माँ तो बस माँ होती है, बच्चों में उसकी जाँ होती है। बचपन ही नहीं वृद्धावस्था व् जीवन के अंत तक हर पल जब भी तुझे स्मरण करता हूँ भाव विहल हो जाता हूँ। माँ, तेरी याद बहुत आती है, .... अब मेरे दामाद सिद्धार्थ, बहु शालिमा व एक नन्हा नाती अद्विक भी हैं; पर माँ, तेरी याद बहुत आती है।।  तिलक- संपादक युग दर्पण मीडिया समूह, 9911111611, 9910774607, 7531949051,
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भारतीय संस्कृति की सीता का हरण करने देखो | छद्म वेश में फिर आया रावण |
संस्कृति में ही हमारे प्राण है | भारतीय संस्कृति की रक्षा हमारा दायित्व || -तिलक

राष्ट्रघाती केजरीवाल, राजनीती में नौटंकी नहीं,

राष्ट्रघाती केजरीवाल, राजनीती में नौटंकी नहीं,

केजरीवाल को राजनीती में नहीं, नौटंकी में होना चाहिए या नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में।

केजरीवाल को राजनीती में नहीं होना चाहिए और शीर्ष पद कदापि नहीं। नौटंकी में या नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में रह कर अपनी महत्वाकांक्षा पूरी करलें, देश की सुरक्षा को संकट का झटका न ही दें।

अरविंद केजरीवाल के नाम का केंद्रीय नेतृत्व के लिए (जो अभी तक काफी परिपक्व नहीं है) विचार किया जाना देश को संकट में डालने के अतिरिक्त कुछ भी नहीं। मैं भी मानता हूँ कि आम चुनावों के लिए, एक मोदी के लिए वोट करना होगा। मोदी विरोधी एनडीटीवी द्वारा एक नवीन सर्वेक्षण में राजग को बहुमत का उल्लेख मिलता है।अब इसके बाद तो विश्वास ही नहीं आश्वस्त भी हूँ देश सुरक्षित हाथों में जायेगा। आश्वस्त का अर्थ ढिलाई नहीं 
दूसरी ओर अब, आआप अरविंद केजरीवाल के लिए वोट क्यों नहीं होना चाहिए, यहाँ एक दर्जन कारण हैं:-
कारण 1: अन्ना हजारे अपने नवीनतम साक्षात्कार (TSI के लिए किये) में कहते हैं कि "प्रधानमंत्री बनने के लिए जुनून अरविंद केजरीवाल के सिर में चला गया है।" प्रधानमंत्री बनने के लक्ष्य में कुछ भी गलत नहीं है, किन्तु देश परिवतन चाहता है तब नेतृत्व वह चाहिए जो कि मुद्दों पर समझौता किए बिना ही सही बातें कर सके। हमें इस बारे में सोचना चाहिए कि परिवर्तन एजेंट, बनकर हमें ठगने, अरविंद केजरीवाल के लिए वोट बिल्कुल नहीं करना चाहिए। यही कारण है कि देश अभी उसके के लिए नहीं देख रहा है कि प्रधानमंत्री बनने के लिए उसके सिर, एक जुनून सवार है। एक कांग्रेस पार्टी जिसके विरुद्ध, अपने पूरे चुनाव अभियान में ही जो अरविंद एक आदमी को मुग्ध कर जीता पर आवश्यक समर्थन नहीं लिया जा सका। और दिल्ली मुख्यमंत्री बनने की उसकी भूख, औरत की भांति नहीं नहीं करते भी दिख गई अनुचित ढंग से, और लालच से दूर रहने का पाखंड करने वाले ने कांग्रेस से जुटाए समर्थन से सत्ता पाकर न शीला को जेल भेजा न जन समस्याओं को सुना न विधान सभा में उनके लिए आवश्यक प्रस्ताव रखे, सबसे बचने का सरल मार्ग, अनुचित ढंग से जन लोकपाल प्रस्तुत कर खोज निकला गया। इसी प्रकार, हर राजनीतिज्ञ, के विरुद्ध जिसने अवसरवाद की अनर्गल आवाज उठाई है, और वह खाप पंचायतों के लिए अपने समर्थन से अवसरवादी समझौता करने के लिए दूर गया था उसने बता दिया कि उन सभी से भिन्न नहीं है। अन्य कारण जानने के लिए अवश्य देखें, हमारे 28 में से ये ब्लॉग - इसी प्रकार कृ इसे भी देखें -

Sunday, April 6, 2014

सत्यदर्पणराष्ट्र दर्पणसमाज दर्पणYuvaa Darpan युवा दर्पण  , भारतस्य शर्मनिरपेक्ष व्यवस्था दर्पण:http://bharatasyasharmnirpekshvyavastha.blogspot.in/

- http://www.thitholeedarpan.blogspot.com/ 
कारण 2: हम एक ऐसा नेता नहीं चाहते हैं, जो स्वयं तो कुछ भी नहीं करता है, किन्तु छद्म रूप में जो किसी मध्यम वर्ग और समर्थ को हास्यास्पद, अल्हड़ लोकलुभावन और वोट बैंक उन्मुख पानी और बिजली के उनके अपने बिलों का भुगतान करने सहित अनुदान में, विगत सरकार के अनमोल और छोटी बचत का धन नष्ट कर सकते हैं। उन्होंने लूटा तो हम चौपट करेंगे। 
कारण 3 : कल्पना करो. एक प्रधानमंत्री की जो पहले से ही अक्षम हमारी पुलिसिंग प्रणाली को बदलने के लिए, सजग न्याय तंत्र को लागू करने आधी रात टोपी पहन निकले, एक बर्बर विधायक के लिए कहता है धूमधाम से,  "मैं एक अराजकतावादी हूँ, तो मेरे विधायक और सांसद भी इस तरह के कृत्यों करते हैं।"
कारण 4: हम सुहृद पूंजीवाद को बदल, विभिन्न मीडिया घरानों में उनके संपर्क के कारण मनीष सिसोदिया, शाज़िया, आशुतोष, जरनैल सिंह और पुण्य प्रसून जैसे इस प्रकार के चयनित तत्वों को टिकट दिया जाता है; जहां सुहृद पत्रकारिता, द्वारा प्रतिस्थापित भ्रमजाल से सांठगांठ पुरस्कृत करना चाहते हैं।  
कारण 5: माओवादी लाल निर्देशिका के सदृश, अरविंद केजरीवाल द्वारा लिखित स्वराज जैसी विसंगत पुस्तकें, और हमारे लोकतंत्र को पहले से ही चुनौती बने उसके बौद्धिक रूप से विकलांग सुझाव, पुस्तक में,  देश भर में सब कुछ निर्धारित करने कि मोहल्ला समितियों' बनाने के प बंगाल के उदाहरण, और सीपीएम प्रकार स्थानीय गुंडई द्वारा देश भर में सभी ओर पूरी तरह से अराजकता के लिए नुस्खे हैं। 
कारण 6: हम सब प्रश्नों के उत्तर में एक बिकाऊ नारा सुन 2 के थक गए हैं- "यह हम आम आदमी के लिए कर रहे हैं " यह आआपा के इन नगण्य बुद्धि और जिनके कोई दृष्टि इन नेताओं का प्रयास, अपनी सभी अयोग्यता को छिपाने के लिए है। जो सच में आम आदमी है, और वास्तव में उनके लिए काम करने वाले एक नेता की आवश्यकता है। किन्तु इसका अर्थ यह नहीं कि सत्ता के लिए उनकी भावनाओं का उपयोग करने का अधिकार किसी को भी बेच देंगे। 
कारण 7: सभी भ्रष्ट और एक ठग है के आरोप सुन- 2 के हम थक गए हैं; हम जानते हैं कौन भ्रष्ट है? हमें समाधान की आवश्यकता है और हम परिवर्तन चाहते हैं। मनमाने निराधार बयानों और अंतहीन दोष खेल की आवश्यकता नहीं है। जो की एक निष्पक्ष विचार है, कि हम किसी भी राज्यों का दौरा कर उनके घर ग्रामीणों के एक चयनित प्रदर्शन और वे कैसे दुखी हैं, दिखाकर उससे विभिन्न नेताओं के विरुद्ध आकर्षक आरोप लगा कर हम सच्चे नहीं बन जाते किन्तु आआपा तो यही करना चाहती है। विकास अनुक्रमित और उन अनुक्रमित में परिवर्तन महत्वपूर्ण हैं। हमारे नेता को ठोस नीतियों के बारे में बात करनी होगी, जिनके माध्यम से हमारे वर्तमान विकास सूचकांकों में उचित परिवर्तन कर सकते हैं।  छिद्रान्वेषी वक्तव्यों और साधारण आक्रोश के लिए नहीं। 
कारण 8: अपनी पत्नी को धोखा देते पकड़ा जाने पर बच्चों की सौगंध खाने, और शीघ्र भूल जाने वाले छिछोरे पति की भांति - छिछोरे अपने प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री हम नहीं चाहते। वह भी एक बचकाना ढंग से जनता में शपथ, ले कर बदल जाये !
कारण 9: जो धूर्त कानून को तोड़ता, अपने बिजली पानी के बिलों को फाड़ने या उन्हें टोल करों का भुगतान नहीं करने, के लिए लोगों को भी उकसाया करते थे, कानून का कोई सम्मान नहीं और उसे दण्डित करना तो दूर माफी के साथ मु मंत्री बना डाला अब प्र मंत्री बनना चाहता है। सरकार वही करने के लिए मुझे दण्डित करेगी या मु मंत्री बनाएगी। तो फिर क्यों उसके लिए अलग नियम होना चाहिए? जो एक बेईमान नेता नहीं चाहते हैं, वे अब भी वह गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली की सड़कों पर किया बेमानी नाटक या प्रशांत भूषण का कश्मीर वक्तव्य भूले नहीं हैं। 
कारण 10: हम सुविधानुसार कुछ भी और हर बात पर दिशा बदल लेने के लिए, जो संदिग्ध जन सर्वेक्षण किया जाता है, जब भी हम अपनी गड़बड़ कार्रवाई का औचित्य प्रमाणित करने से बचना चाहते हैं, एक तथाकथित जन सर्वेक्षण के द्वारा जनाकांक्षा को कारण के रूप में बेचना शुरू करना चाहते हैं। परिणाम बंद दरवाजे में रहता है जिससे मनचाहा किया जा सके। यह एक सस्ते प्रकार की, हास्यास्पद नौटंकी है .
कारण 11: हम केंद्र में घटिया 'झाड़ूसरकार नहीं चाहते जिसकी अधिकतम आयु दो महीने तथा गुणवत्ता न्यूनतम है। 
कारण 12: और अंत में, हम सब निश्चित रूप से हमारे प्रधानमंत्री से नहीं चाहते कि कुछ बिल के पारित करने की मांग करते हुए, अपनी ही सरकार के विरुद्ध, अपने ही कार्यालय या राष्ट्रपति भवन के बाहर धरने पर बैठे। एक ऐसा मूर्खता पूर्ण सनकी राष्ट्रीय नाटक अंतरराष्ट्रीय समुदाय  स्तर पर देखने की कल्पना करो। मुख्यमंत्री के रूप में केजरीवाल के साथ यह निराला खेल देखा है। अब फिर इस उपहास के लिए तैयार नहीं, तब केवल राष्ट्र इसके लिए गवाह था, हम या जो भी, ऐसा सन्देश बाहर नहीं भेजना चाहते, कृपया हमें अद्वितीय अवसर प्रदान न कराएं। नौटंकी का साथ छोड़ दें। 
केजरीवाल को राजनीती में नहीं किसी नौटंकी में या नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में होना चाहिए। 

12 reasons why you should not vote for Arvind Kejriwal!

I voted for him during the Delhi elections, but I had also mentioned then that for the general elections, one must vote for Modi. At that point of time, I had believed that Arvind Kejriwal was not (yet) mature enough to be considered for central leadership. Now, I am convinced he is not even mature enough for the next Delhi assembly elections. Here are a dozen reasons why you should not vote for Arvind Kejriwal: 
Reason #1:Anna Hazare says in his latest interview to TSI that “obsession to become Prime Minister has gone into Arvind Kejriwal’s head”. That’s exactly why we should not vote for Arvind Kejriwal. Having the aim to become the PM is nothing wrong. But the change agent, who the country is looking out for right now, should think of doing only the right things without compromising on issues. Not an infatuated man who is risibly obsessed with becoming the Prime Minister. Arvind could not even stay away from his esurient greed to become the CM of Delhi and took aquisitive support from the same Congress party, against which his entire election campaign had been mobilised. Similarly, and shockingly, he has voiced his intemperate support for Khap panchayats and is making all those venal compromises that every politician, who he speaks of against, makes. 
Reason #2:We do not want a leader who does nothing himself, but spuriously doles away the precious and little savings of the previous government in ridiculously thoughtless, populist and vote-bank oriented subsidies to the middle class and rich, who can in any case afford to pay their bills, including those of water and electricity.
Reason #3:We do not want Gandhi-topi wearing vandal MLAs implementing a midnight vigilante justice mechanism to replace our already poor policing system. Imagine a PM who grandiosely claims, “I am an anarchist, so let my MLAs and MPs do such acts too”. We want the dignity of the Gandhi cap to remain sacrosanct. In fact, every Congress member and BJP member must also wear the same cap and roam around until AAP members stop using it to spread group fear.
Reason #4:We do not want crony capitalism to be replaced by crony journalism, where people like Manish Sisodia, Shazia Ilmi, Ashutosh, Jarnail Singh and others are carefully selected and given tickets due to their connections in different media houses; and those like Punya Prasun, who have not yet been given tickets, kept for their benefit in media houses, to be colluded with and used slyly when required in order to manipulate the unsuspecting masses by playing up farcically planned comments in so called live interviews, and by playing down questions that are of crucial importance to the nation.
Reason #5:Akin to the Maoist Little Red Book, we do not want fatuously illogical books like Swaraj by Arvind Kejrial to be the book guiding our already challenged democracy. In the book, his heart might be at the right place, but his utterly uninitiated and intellectually handicapped suggestions, for example of making ‘mohalla committees’ decide everything across the country, are prescriptions for chaos, and would result in CPM-type local goondaism and anarchy all across the country.
Reason #6:We are tired of hearing one slogan-mongering answer to all questions: “We are doing this for the aam aadmi”. It seems the leaders of AAP have negligible intellect, have no vision and hide behind one answer to hide all their illiteracy. We need a leader who knows who is the true aam aadmi, and really works for them, instead of using their sentiments to take the masses for a ride.
Reason #7:We are tired of hearing that everyone is corrupt and a thug; we already have a fair idea of who is corrupt. We need solutions and we need changes, not random, sweeping, unsubstantiated statements and unending blame games. We also do not want him making beguiling allegations against various leaders by touring their home states, picking up a handful of villagers and showing how miserable they are. What matters are development indexes and the changes in those indexes. Our leader has to talk about how he can make better changes in our current development indexes through concrete policies, not captious rhetoric and banal outbursts.
Reason #8:We do not want our Prime Minister or Chief Minister of the nation’s capital swearing on his children – like a husband does to his wife, when caught cheating on her – that too in public in a puerile manner, and soon after that going back on that very sworn statement.
Reason #9: We do not want an unscrupulous leader who doesn’t have any respect of law and breaks the law with knavish impunity, whether by exhorting people to not pay toll taxes or asking them to tear up their bills. I am still amazed about how there has been no action against him for the facetious drama he did on Delhi streets before Republic Day. Would the government have spared me for doing the same? Then why should be there different rules for him?
Reason #10:We do not want dubious mass surveys to be hawked as reasons for taking U-turns on anything and everything for convenience. It’s a cheap, laughable gimmick that whenever I want to do something that people might question, I’ll peddle speciously fishy, closed-door results of a so-called mass survey to justify my actions.
Reason #11:We do not want the government at the Center to have the life of a poor quality local ‘jhadoo’ (the broom-his party symbol), which is invariably less than two months.
Reason #12:And finally, we most certainly do not want our Prime Minister to sit on a dharna outside his own office or the Rashtrapati Bhavan, against his own government, demanding the passing of certain bills. We have seen this wacky joke playing out with Kejriwal as CM. Still, one could take heart that mostly, only the nation was witness to it. Imagine the international community seeing such absurdly batty dramas unfolding at a national level. Please, spare us the unique opportunity.
भारतीय संस्कृति की सीता का हरण करने देखो | छद्म वेश में फिर आया रावण |
संस्कृति में ही हमारे प्राण है | भारतीय संस्कृति की रक्षा हमारा दायित्व || -तिलक

बुधवार, 30 अप्रैल 2014

तिवारी ने गडकरी से मांगी, बिना शर्त क्षमा
केन्द्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने दुर्भावना पूर्वक भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी के विरुद्ध आदर्श सोसायटी घोटाले के संदर्भ में लगाए गए मिथ्या आरोपों के लिए उनसे ‘‘बिना शर्त क्षमा’’ मांगी है। भाजपा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार तिवारी ने न्यायालय में दिए लिखित वक्तव्य में गडकरी पर लगाए गए गलत आरोपों के लिए क्षमा मांगते हुए कहा है कि भविष्य में वह आदर्श सोसायटी को लेकर उनके बारे में ऐसी कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, जिनसे उनकी मानहानी हो। तिवारी ने कांग्रेस प्रवक्ता के रूप में 10 नवंबर, 2010 को संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया था कि गडकरी का आदर्श सोसायटी में 'बेनामी फ्लैट' है।
गडकरी ने इस आरोप का खंडन करते हुए तिवारी से क्षमा मांगने को कहा था, किन्तु तब ऐसा नहीं करने पर उन्होंने आपराधिक मानहानि का मामला अंकित किया। तिवारी ने मुंबई की अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की न्यायालय में दिए लिखित वक्तव्य में कहा, कि आदर्श सोसायटी घोटाले की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग की रपट देखने के बाद यह स्पष्ट हुआ है, कि ‘‘इस घोटाले में आपका किसी तरह का कोई लेना देना नहीं था।’’ उन्होंने स्वीकार किया, कि 10 नवंबर, 2010 को उन्होंने जो वक्तव्य दिया था, वह सही तथ्यों पर आधारित नहीं था। गडकरी ने तिवारी की ‘‘बिना शर्त क्षमा याचना’’ के बाद न्यायालय से कांग्रेस नेता के विरुद्ध अपनी याचिका वापस ले ली है। 
मनीष तिवारी ने तो "क्षमा याचना’’ कर ली किन्तु इन मिथ्या आरोपों के सन्दर्भ से केजरीवाल मिथ्या आरोपों के प्रहार करता रहा तथा भाजपा के विरुद्ध जनता को भ्रमित कर लोकतंत्र से खिलवाड़ करता रहा। जब तक मनीष तिवारी अथवा केजरीवाल जैसों पर प्रभावी रोक क़ी कर्यवाही नहीं होती तब तक हम इसे सफल लोकतंत्र में चुनाव आयोग की निष्पक्षता कैसे मान लें। 
नकारात्मक मीडिया के सकारात्मक व्यापक विकल्प का
सार्थक संकल्प -युगदर्पण मीडिया समूह YDMS- तिलक संपादक
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सोमवार, 7 अप्रैल 2014

भाजपा को स्थापना दिवस उपहार

भाजपा को स्थापना दिवस उपहार 
'Spectacular BJP win'भाजपा और उसके सहयोगी दलों को लोकसभा चुनाव में अभी तक 259 सीटों पर विजय, शुक्रवार को जारी एक सर्वेक्षण के अनुसार, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन को 123 सीटें पाने का अनुमान है। 
जिसमे भाजपा 214 सीटों का अनुमान और कांग्रेस 104, एनडीटीवी द्वारा सर्वेक्षण के अनुसार। 
उत्तर प्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में जहां भाजपा ने नरेंद्र मोदी को अपनी ओर से प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के रूप मैदान में उतारा है, भाजपा के लिए यह एक "भव्य जीत" दर्शाता है। 



'भाजपा की भव्य जीत'

भाजपा को 2009 चुनाव में मात्र 10 की तुलना में, राज्य की 80 सीटों में से 53 जीत की आशा है. 
उत्तर प्रदेश केंद्र में सत्ता की कुंजी है क्योंकि अब तक भाजपा का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1998 के चुनावों में था, जब यह राज्य में 57 सीटें जीती है। 
भाजपा सवर्ण और पिछड़ी जाति के मतदाताओं का एक गठबंधन यह बनाने के लिए काम 1990 के दशक में उत्तर प्रदेश में बड़ी विजय का संकेत है। दूसरी ओर दक्षिण में तेदेपा की राजग में वापसी, 10 वर्ष पश्चात् भाजपा के भाग्य का चक्र घूमा है। यह भाजपा को उसके स्थापना दिवस उपहार है। 
सर्वेक्षण से यह भी पता चला है, कि हर राज्य के किसी क्षेत्र में बड़े नेताओं के क्षेत्ररक्षण की अपनी रणनीति के साथ भाजपा का भाग्योदय हो सकता है। 
A new
survey says
the BJP is
expected to win
53 of UP's 80 seats,
compared to just
10 in the 2009
polls. Pictured is BJP prime ministerial candidate Narendra Modiचित्र में भाजपा प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी
 
सर्वेक्षण में कांग्रेस और अजित सिंह के नेतृत्व में अपने सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकदल के लिए सबसे बड़ा क्षय की भविष्यवाणी की गई है। 
वे 2009 में 26 सीटों में से मात्र सात सीटों के लिए आशा कर रहे हैं। 
उत्तर प्रदेश में भाजपा का लाभ भी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के लिए खाते से हैं। 
2009 में राज्य में सबसे अधिक सीटें जीतने वाली समाजवादी पार्टी, इस समय मात्र 13 या नीचे10सीटों पर सीमित रह जायेगी। 
पार्टी को गत वर्ष के मुजफ्फरनगर दंगों के प्रभाव का फल भुगतना लगता है और गत माह के सर्वेक्षण निष्कर्ष में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को संसद में 230 का तथा कांग्रेस और उसके सहयोगियों के लिए 128 सीटों का आंकड़ा दर्शाया गया था। 
यह नया सर्वेक्षण, पहले सर्वेक्षण से भी एक मामूली उच्च आंकड़ा प्रस्तुत करता है। नए साथी जुड़ना चालू है, तथा स्थिति और बदलेगी। 
एक नए सर्वेक्षण से कहते हैं. कि भाजपा को उत्तर प्रदेश की 2009 चुनाव में मात्र 10 की तुलना में 80 सीटों में से 53 जीत की आशा है।उत्तेजना व भूलों से बचे रहें, अंतत: लक्ष्य 272+ सफल हो ही जायेगा। 
The BJP has been working to build a coalition of upper caste and backward caste voters that won it big rewards in Uttar Pradesh in the 1990s, the latest survey showed.



The poll also showed that the BJP may have struck gold with its strategy of fielding big leaders in every region of the state.
The poll predicted the biggest losses for the Congress and its ally Rashtriya Lok Dal led by Ajit Singh.
They are expected to crash to a mere seven seats from 26 seats in 2009.
The BJP's gains in Uttar Pradesh also come at a cost to the Samajwadi Party and the Bahujan Samaj Party.
The Samajwadi Party, which won most seats in the state in 2009, is set to bag just 13 this time, down 10 seats.
The party seems set to face the impact of the last year's Muzaffarnagar riots and a less than "impressive record of governance", the poll showed. The findings were based on a survey conducted last month.
Another poll conducted by the channel in February had given the BJP and its allies 230 of the 543 directly elected seats in the lower house of Parliament.
The earlier poll had also projected a marginally higher figure of 128 seats for the Congress and its allies.
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शनिवार, 5 अप्रैल 2014

कोबरा पोस्‍ट व ऑपरेशन ' जन्‍मभूमि' की वास्तविकता

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You- Will Start Loving Narendra Modi
Modi Haters & Kejri Lovers A Must Watch Video for You- Will Start Loving Narendra Modi
YOUTUBE.COM|BY NARENDRAMODIBJP
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कोबरा पोस्‍ट व ऑपरेशन ' जन्‍मभूमि' की वास्तविकता, जानिये.....
ऑपरेशन ' जन्‍मभूमि' दिखाने वाले कोबरा पोस्‍ट को छद्म स्टिंग के लिए नेटवर्क 18 अर्थात सीएनएन-आईबीएन समूह, टीवी टुडे अर्थात आजतक समूह, कल का स्‍टार अर्थात आज का एबीपी न्‍यूज, वित्त पोषण करता है। इसकी पुष्टि स्वयं कोबरा के स्वामी अनिरुद्ध बहल ने‍ एक साक्षात्‍कार में की, जिसका सूत्र http://blogs.wsj.com/indiarealtime/2013/03/21/qa-what-is-cobrapost/ है। इन चैनलों का भाजपा व नरेंद्र मोदी विरोध छिपा नहीं है। आईबीएन समूह के प्रमुख संपादक राजदीप सरदेसाई के विरुद्ध तो लूनावाड़ा नरकंकाल मामले में कब्र खोदकर शव निकालने वाली, तीस्‍ता सीतलवाड़ को सुझाव देने का शपथ पत्र अदालत में जमा है,शव निकालते समय टीवी टुडे का राहुल सिंह भी तीस्‍ता को सहायता के लिए उपस्थित था, गुजरात दंगों के समय स्‍टार टीवी ने दंगा भड़ाकाने जैसी रिपोर्टिंग की थी। ये तो कुछ उदाहरण हैं, इनकी पूरी वास्तविकता तो वरिष्ठ पत्रकार श्री संदीप देव ने अपनी पुस्‍तक '' साजिश की कहानी-तथ्‍यों की जुबानी''http://aadhiabadi.com/shop/books/namo-books/namo-books6-detail में खोली है। पाकिस्‍तान से अधिक हमारे देश के शत्रु ये पत्रकार हैं, जो हर समय छद्म स्टिंग और छद्म सूचना के माध्यम देश को सांप्रदायिकता की आग में झोंकने को तत्पर रहते हैं।
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'मौत का सौदागर' से 'जहर की खेती'-तक

'मौत का सौदागर' से 'जहर की खेती'-तक की शीर्ष से हुई अभिव्यक्ति, तथा उसपर केंद्रीय चुनाव आयोग का मौन, का ही परिणाम है, किसी प्रत्याशी की यह बहक, कि नरेन्द्र मोदी को काटकर टुकड़े-टुकड़े कर देंगे. देश के जिस क्षेत्र में ऐसी प्रगल्भता भरी अभिव्यक्ति हुई है, उसे सदैव ‘संवदेनशील’माना गया है | यदि अब भी कार्यवाही नहीं होती, तो स्थिति बिगड़ने का दोषी कौन ?
किसी के एक ‘अपराध’ को हजारों ‘अपराध’ करने वालों से अधिक महत्वपूर्ण बताए जाने का एक ही उद्देश्य है. एक वर्ग-विशेष में भय पैदा कर उन्हें अपनी पक्षधर बनाना.
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लोकसभा चुनाव की तिथियां घोषित होने के लगभग दो वर्ष पूर्व से देश में यह माहौल बन रहा था कि इस बार के निर्वाचन में सुशासन, महंगाई और भ्रष्टाचार की समस्याओं के कारण आर्थिक विकास मुख्य मुद्दा रहेगा. भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों को जैसा व्यापक जन समर्थन मिला था, उससे यह स्पष्ट हो रहा था कि जनता किसी भी रूप में-चाहे पद का दुरुपयोग हो, या फिर कमीशनखोरी-भ्रष्टाचारियों को सत्ता से बेदखल कर देने के मूड में है. जनता को तब भारी निराशा हुई, जब इस मानसिकता को पनपाने में मुख्य भूमिका निभाने वालों में सत्ता की लोलुपता ने बिखराव पैदा किया. लेकिन इसी बीच एक व्यक्ति फिर उभर कर सामने आया, जिसने विकास को चुनावी मुद्दा बना दिया. उस व्यक्ति के अभियान को पिछले डेढ़ दशक से घृणा और हिंसा की राजनीतिक करने के लिये देश-विदेश में ‘अपराधी’ के रूप में खड़ा करने की कोशिश की जा रही थी. इन लोगों का अनुमान था कि उनका विकास का मुद्दा चल नहीं पायेगा क्योंकि उनके विरुद्ध घृणा और हिंसा की राजनीति करने के आरोपों का व्यापक प्रभाव है. लेकिन विकास का मुद्दा परवान चढ़ता गया. यही नहीं, लोगों में यह विश्वास भी बढ़ता गया कि देश के विकास की सकारात्मक सोच इसी व्यक्ति में है. उसे मौत का सौदागर आदि से संबोधित करने के प्रतिफल से सबक सीखने के बजाय उसके प्रति घृणा की भावना को प्रखर बनाने के लिये न्यायालय तक के फैसलों का मान नहीं किया गया. विकास और सुशासन के मामले में केंद्रीय सरकार की संस्थाओं द्वारा सराहे जाने के बावजूद सरकार चलाने वालों ने उसके शासन को सब प्रकार के अवगुणों की खान साबित करने के लिये ‘सांप्रदायिकता बनाम सेक्युलरिज्म’ का सहारा लिया.
सेक्युलरिज्म के नाम पर जिस प्रकार के संबोधनों से अनर्गल आरोपों की जैसी बौछार की गई, उसका ही परिणाम ‘बोटी-बोटी काट डालने’ की अभिव्यक्ति के रूप में सामने आये. आश्चर्य तो यह है कि जो समुदाय वोट बैंक की राजनीति से निकलने का दावा कर रहा था, जो हर मामले में निन्दा अथवा फतवा जारी करने का आदी है, वह इस अभिव्यक्ति पर मौन है. शायद उसके इस मौन समर्थन से ही प्रोत्साहन मिला होगा. एक ओर, नेता यह कह रहे हैं कि ऐसी अभिव्यक्ति हमारी पार्टी की नीति नहीं है, दूसरी ओर, उसे उम्मीदवारी से बेदखल करने के बजाय उसके समर्थन में लामबंद हो रहे हैं. यह अभिव्यक्ति कुछ महीने पहले की है, जब वह दूसरी पार्टी में था. लेकिन ऐसी आग उगलने का समय कुछ भी रहा हो, वह समाज को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और वैमनस्य से ही झुलसाएगी. जो सेकुलर तबका मुतालिक को भाजपा में शामिल करने पर उबल पड़ा था, वह इमरान मसूद के मामले में मौन क्यों हैं? किसी के एक ‘अपराध’ को हजारों ‘अपराध’ करने वालों से अधिक महत्वपूर्ण बताए जाने का एक ही उद्देश्य है. एक वर्ग विशेष में भय पैदा कर उन्हें अपना पक्षधर बनाना. देश इस समय अनेक प्रकार की अनास्थाओं के भंवर में फंसा है. विकास के नारे ने अनास्था के इस भंवर से बाहर निकलने की एक आशा पैदा की है. घोर निराशा एवं विघटन के माहौल में दुष्प्रचार के बीच अडिग खड़े रहने वाले विकास मुद्दे के वाहक पर जितना ही प्रहार किया जा रहा है, वह उतना ही सशक्त होता जा रहा है. क्यों? क्योंकि जनता को उसकी कथनी और करनी में अंतर नहीं दिखाई देता. इस जनविश्वास को डिगाने के लिये विभेदकारी और हिंसात्मक प्रवृत्ति को उभारने का प्रयास देशद्रोह से कम नहीं है. अगले कुछ दिनों में यह प्रवृत्ति और पनपेगी, ऐसा इस आधार पर कहा जा सकता है कि विकास को चुनावी मुद्दा बनाने वाले इस व्यक्ति पर सभी राजनीतिक पक्ष हमलावर हो चुके हैं. उन्हें एक साथ लामबंद करने का प्रयास यद्यपि सफल नहीं हो सका है, लेकिन समाज के एक वर्ग को जो भयदोहन का शिकार कर रहा है, फिर से उसी दिशा में लौटने की बाध्यता का शिकार होने जा रहा है. इस बार का चुनावी माहौल कुछ ऐसा है कि जिसमें अपनी कर्तव्यनिष्ठा के प्रति अनुकूलता पैदा करने से अधिक दूसरों की विश्वसनीयता को संदिग्ध साबित करने की होड़ मची है. मतदाताओं को, जो वास्तव में चुनाव-परिणाम के असली भुक्तभोगी होंगे, सोच समझकर निर्णय करना होगा.
मतदाताओं को अपने विवेक का प्रयोग करते हुए दुष्प्रचार की आंधी में उड़ने या मुद्दों पर दृढ़ता से कायम रहने का निर्णय करना होगा क्योंकि उसके निर्णय पर ही पूरे देश की सुखद संभावनायें निर्भर हैं. निराशा, हताशा, प्रलोभन, जातीय, वर्गीय और क्षेत्रीय भावनाओं से ऊपर एक राष्ट्र की भावना से ही बिखराव रोका जा सकता है. किसी व्यक्ति को काटकर टुकड़े-टुकड़े करने की अभिव्यक्ति का निहितार्थ समझना होगा और यह भी कि इसके प्रति किसकी कैसी अभिव्यक्ति हुई है या नहीं हुई है.
भारतीय संस्कृति की सीता का हरण करने देखो | छद्म वेश में फिर आया रावण | संस्कृति में ही हमारे प्राण है | भारतीय संस्कृति की रक्षा हमारा दायित्व || -तिलक